2017 की 15 ऐसी खास फिल्मों को देखना मत भूलियेगा…

0
20226

रिलीज के दौरान कमजोर आंका गया था इन फिल्मों को।

एक फिल्म वो होती है जिसका ट्रेलर देखकर हमारा दिल गार्डन-गार्डन हो जाता है। उसे देखने के लिए हम वीकेंड का महंगा टिकट खरीदते हैं। पेट्रोल जलाकर थियेटर तक जाते हैं। भूख लगने पर टिकट से महंगे दामों में पॉपकॉर्न खरीदते हैं। मगर जब थिएटर से फिल्म देखकर बाहर निकलते हैं तो ऐसा महसूस करते हैं जैसे किसी ने हमारी जेब काट ली हो क्योंकि फिल्म में हमारे साथ ‘ऊंची दुकान और फीके पकवान’ वाली बात हो जाती है।

वहीं दूसरी तरफ कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं जिनका ट्रेलर कब आया, हमें कुछ पता नहीं चलता। घर पर कभी टीवी पर ऐसी कोई फिल्म दिख जाए तो हम बिना किसी उम्मीद के इसे देख लेते हैं क्योंकि हमें कोई काम नहीं होता। लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती जाती है, हमें एहसास होने लगता है कि हमने इसे पहले क्यों नहीं देखा? जब फिल्म खत्म होती है तो हमें वैसी तृप्ति मिलती है जैसे गर्मी में गला सूखने के बाद मटके का ठंडा पानी पीने पर मिलती है।

ऐसी ही कुछ फिल्में साल 2017 में भी आई हैं। उनके नाम आज हम आपके साथ साझा कर रहे हैं। मौका मिलते ही देख लीजिएगा।

शुभ मंगल सावधान

आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर की इस फिल्म में मर्दाना कमजोरी जैसे गंभीर मुद्दे को बहुत मजेदार अंदाज में दिखाया गया है। यह फिल्म एडल्ट सब्जेक्ट पर बेस्ड होने के बावजूद बिलकुल भी अश्लील नहीं है और आपका भरपूर मनोरंजन भी करती है।

‘हिंदी मीडियम’

इरफ़ान खान जैसे शानदार एक्टर्स के अभिनय वाली यह फिल्म एक अहम सामाजिक मुद्दे को इतने मजेदार ढंग से आपके सामने पेश करती है कि आपका मनोरंजन भी होता है और आप सोचने पर भी मजबूर हो जाते हैं।

‘बरेली की बर्फी’

अपने नाम की तरह ‘बरेली की बर्फी’ एक स्वीट फिल्म है जो आपको एक सेकंड के लिए भी बोर नहीं होने देती। इस फिल्म का मुख्य आकर्षण राजकुमार राव का अभिनय है। राजकुमार इस फिल्म में कृति सैनॉन और आयुष्मान खुराना पर भी भारी पड़े हैं।

‘द गाजी अटैक’

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए अंडरवाटर युद्ध पर आधारित यह फिल्म बेहद रोचक है। फिल्म में आखिर तक रोमांच बना रहता है।

‘मॉम’

श्रीदेवी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना के दमदार अभिनय वाली यह फिल्म एक माँ और बेटी के रिश्ते की कहानी है। फिल्म में दिखाया गया है कि माँ कितनी पावरफुल होती है और अपने हक की लड़ाई अकेले भी लड़ सकती है।

‘शादी में जरूर आना’

हाल ही में रिलीज हुई राजकुमार राव की फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ एंटरटेनमेंट का एक कम्पलीट पैकेज है। फिल्म में रोमांस, बदला, बेहतरीन गाने, दमदार डायलॉग्स, ट्विस्ट्स जैसे सभी मसाले मौजूद हैं।

‘बेगम जान’

बेगम जान, आजादी के समय कोठे में रहने वाली वेश्याओं की फिल्म है जो आपके दिल को छू लेती है। यह फिल्म ‘बेगम जान’ नाम की एक महिला की बहादुरी की कहानी कहती है, जिसे बंटवारे या आजादी से कोई फर्क नहीं पड़ता, वो अपना कोठा बचाने के लिए लड़ाई छेड़ देती है।

‘करीब-करीब सिंगल’

‘करीब-करीब सिंगल’ में भी आपको ‘टैलेंट की खान’ इरफ़ान खान का बेबाक अंदाज देखने को मिलता है। ‘डेटिंग ट्रिप’ वाली ये अनोखी लव स्टोरी आपके दिल में उतर जाने का दम रखती है।

‘राग देश’

‘पान सिंह तोमर’ और ‘साहब बीवी और गैंगस्टर’ जैसी फ़िल्में बनाने वाले तिग्मांशु धुलिया की यह फिल्म साल 1945 में आजाद हिन्द फौज के तीन जवानों की कहानी दिखाती है। इस फिल्म में आजादी की कुछ अनसुनी घटनाओं और किस्सों को दिखाने की बेहतरीन कोशिश की गई है।

‘गुड़गांव’

अगर आप डार्क थ्रिलर फ़िल्में देखना पसंद करते हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। ‘गुड़गांव’ शहर की एक फैमिली की ये कहानी आपको आखिरी तक बांधे रखती है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी का जबरदस्त अभिनय भी देखने लायक है।

‘ट्रैप्ड’

राजकुमार राव इस साल अन्य एक्टर्स के मुकाबले उभरकर सामने आए हैं। ‘ट्रैप्ड’ भी उनके अभिनय से सजी एक ऐसी ही फिल्म है जो आपको सीट से हिलने का मौका नहीं देती। इसमें दिखाया गया है कि हालात कैसे भी हों, इंसान को हार नहीं माननी चाहिए।

‘अ डेथ इन द गंज’

कई फिल्म फेस्टिवल्स का हिस्सा बन चुकी कोंकणा सेन शर्मा द्वारा निर्देशित यह फिल्म पारिवारिक भावनाओं के उथल-पुथल और रिश्तों के अनदेखे पहलू पर रोशनी डालती है। इस फिल्म को एक बार देखना तो बनता है।

‘हरामखोर’

कई फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा चुकी नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म ‘हरामखोर’ बॉक्स ऑफिस पर तो कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी लेकिन शादीशुदा टीचर और मासूम स्टूडेंट की यह कहानी काफी मनोरंजक है। इसे एक बार जरूर देखा जाना चाहिए।

‘न्यूटन’

राजकुमार राव और पंकज त्रिपाठी के अभिनय से सजी इस फिल्म को अगर आपने मिस कर दिया है तो शायद आपने बहुत बड़ी गलती कर दी है। भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए भेजी गई यह अधिकृत एंट्री वाली फिल्म देश के दूर-दराज इलाकों में होने वाले चुनाव और वहां के लोगों की समस्याओं को दिखाती है।

‘लिपस्टिक अंडर माय बुरका’

हमारे समाज में महिलाओं की आजादी को जकड़ने वाली बेड़ियों पर वार करने वाली इस फिल्म को लेकर काफी विवाद हुआ था। यह फिल्म महिलाओं की जिंदगी और उनकी परेशानियों को काफी करीब से दिखाती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here