तो इसलिए नीचे से खुला होता है ऑफिस या मॉल में टॉयलेट का दरवाजा जानिए, आखिर क्यों?”…

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“टॉयलेट”, एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में पहले लोग पब्लिक में बात करने से कतराते थे। लेकिन आजकल तो “टॉयलेट” शब्द जैसे चलन में आ गया है। जिन लोगों के यहां ये नहीं है, सरकार उनके पीछे पड़ गई है कि “टॉयलेट” बनवाओ। और तो और इसके बिना लोग चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं। कई जगह तो इसके ना होने पर लोगों की दुल्हनियां तक भाग रही हैं। यही कारण है कि हमारे हीरो ने तो इस पर फिल्म भी बना दी है।

गन्दे और बदबूदार सार्वजनिक शौचालयों से निजात दिलाने के लिये जापान की एक गैर सरकारी संस्था ने ‘जैविक-शौचालय’ विकसित करने में सफलता हासिल की है। ये खास किस्म के शौचालय गन्ध-रहित तो हैं ही, साथ ही पर्यावरण के लिये भी सुरक्षित हैं। समाचार एजेंसी ‘डीपीए’ के अनुसार संस्था द्वारा विकसित किये गए जैविक-शौचालय ऐसे सूक्ष्म कीटाणुओं को सक्रिय करते हैं|

इस प्रक्रिया के तहत मल सड़ने के बाद केवल नाइट्रोजन गैस और पानी ही शेष बचते हैं, जिसके बाद पानी को पुनःचक्रित (री-साइकिल) कर शौचालयों में इस्तेमाल किया जा सकता है। संस्था ने जापान की सबसे ऊँची पर्वत चोटी ‘माउंट फुजी’ पर इन शैचालयों को स्थापित किया है। गौरतलब है गर्मियों में यहाँ आने वाले पर्वतारोहियों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले सार्वजनिक शौचालयों के चलते पर्वत पर मानव मल इकट्ठा होने से पर्यावरण दूषित हो रहा है।

खैर! हमारा मकसद “टॉयलेट” की विशेषताएं बताना नहीं है। इसके बारे में और भी कई बातें हैं जो अब से पहले किसी के दिमाग में नहीं आई। जैसे कि मॉल्स या ऑफिस में होने वाले टॉयलेट्स या कहीं और पब्लिक टॉयलेट्स के दरवाजे फर्श के कुछ इंच ऊपर ही खत्म क्यों हो जाते हैं इसकी की भी कही न कही कुछ खाशियत ही होगी तभी तो ये निचे से खुले बनाये जाते है|

चलिए आज हम आपको बताते हैं।
“टॉयलेट”

पीएम नरेंद्र मोदी के “स्वच्छ भारत अभियान” के तहत आपको हर जगह टॉयलेट्स मिल जाएंगे जिनका आप इस्तेमाल कर सकते हैं। ख़ासतौर पर ऑफिसेस, मॉल और पब्लिक प्लेस पर टॉयलेट्स रहते ही हैं।

“टॉयलेट” पर खिड़की का दरवाजा

जब भी हम पब्लिक प्लेसेस के टॉयलेट के दरवाजे को देखते हैं तो मन में एक बार तो ये खयाल जरूर आता है कि आखिर इसका दरवाजा इतना छोटा क्यों है? क्या इस पर खिड़की का दरवाजा लगा दिया गया है? आइये जानते हैं।

सफाई करने में आसान

पब्लिक टॉयलेट्स सारा दिन इस्तेमाल होते हैं। इस वजह से वहां का फर्श लगातार खराब होता रहता है। अतः फर्श और दरवाजे के बीच जगह होने से टॉयलेट में पोछा लगाना आसान हो जाता है।

गलत कामों पर रोक

सामान्यतः पब्लिक टॉयलेट्स इसलिए होते हैं कि जरूरत के समय लोगों के काम आ सके। लेकिन कुछ महानुभाव अंदर बैठकर सिगरेट-शराब का सेवन करने से भी नहीं चूकते। ऐसे में इन दरवाजों के माध्यम से अंदर की एक्टिविटी पर ध्यान देने के लिए ऐसे दरवाजे बनाए जाते हैं।

सेक्सुअल कामों पर रोक

कभी-कभी कुछ लोग पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल सेक्सुअल एक्टिविटी के लिए भी करते हैं। इसलिए ऐसा दरवाजा रखा जाता है कि प्राइवेसी रहे लेकिन इतनी भी ना रहे कि लोग गलत काम करने लगे।

इमरजेंसी में लाभदायक

अगर कोई मरीज टॉयलेट गया हो और अचानक उसकी तबीयत बिगड़ जाए तो वो वहीं फंसा रह सकता है। ऐसे दरवाजे होने से मरीज को बाहर लाने में थोड़ी सुविधा हो जाती है।
अंदर कौन बैठा है?

इस तरह के दरवाजों का एक उपयोग यह भी है कि हमें बाहर से ही देखने को मिल जाता है कि अंदर कौन बैठा है? कौन कितने समय से अंदर है ?

बच्चे खुद को लॉक कर ले तो

कभी-कभी छोटे बच्चे अंदर से टॉयलेट को लॉक कर लेते हैं। उन्हें समझ ही नहीं आता है कि लॉक को कैसे खोलें। ऐसे में अगर बच्चे की मदद के लिए कोई ना हो तो वो दरवाजे की इस गैप से बाहर आ सकते हैं।

कम जगह में अच्छा काम

लोग मॉल्स और ऑफिस में ज्यादा जगह घेरने वाले टॉयलेट्स बनाने से कतराते हैं। इस तरीके से कम जगह में सस्ते और अच्छे टॉयलेट्स बनाए जा सकते हैं।

खलल से बचने का तरीका

ऊंचे दरवाजे रहने का एक कारण यह भी है कि ऊँचे दरवाजे से बाहर वाले को आपके पैर दिखते हैं, इससे कोई भूल कर भी आपके काम में खलल डालने नहीं आता। आखिर ये भी तो आराम का मामला है।

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