ये सब हैं स्कूलों के वो नियम जिन्हें जानकर आप हो जाएंगे हैरान देखिये, कुछ ऐसी ही 10 तस्वीरें…

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हर बीता हुआ लम्हा जाने कब याद बन जाता है यह पता ही नहीं चलता है। आगे जाकर यादें ही हमें अहसास दिलाती हैं कि समय कितनी तेजी से आगे बढ़ चुका है। अब स्कूल टाइम को ही लीजिए। उस समय की यादें आज भी हमको इमोशनल कर देती हैं।

आपकी भी कोई न कोई याद तो स्कूल से जुड़ी हुई होगी ही। आमतौर पर जब बच्चे स्कूल पहुंचने में लेट हो जाते थे तो उन्हें सजा के तौर पर बाहर खड़ा रखा जाता था। कुछ को मुर्गा भी बना दिया जाता था। हालांकि हर स्कूल में सजा मिलने का तरीका भी अलग था।

बचपन, ये वो शब्द है जिसे सुनते ही मन मे असीमित यादों का भंडार उभरने लगता है , यह ऐसा शब्द है जिस सुनते ही उस गुज़रे वक़्त को एक बार फिर से जीने का मन कर उठता है ।

बचपन की बात उठते ही मन में सबसे पहले अपने भाई बहनों के साथ बिताया वक़्त और फिर कुछ खास दोस्तों के साथ बिताया वक़्त याद आता है जिसमे प्यार व तकरार दोनों शामिल होते थे ।

बचपन की ऐसी प्यारी यादें समेट रखी हैं इस मन ने की कभी होंठों पर मुस्कुराहट आ जाती है तो कभी किसी अपने को याद करके आंख भर आती है । कितना प्यारा वक़्त था वो बचपन , वो अपनी मस्ती में रहना, कोई चिंता नही , कोई फिक्र नहीं, एकदम आज़ाद पंछी की तरह और उसी पंछी की तरह ऊंचे आसमान में उड़ने का सपना , वो हसीन लम्हे भुलाये नहीं भूलते पर इस बचपन में बहुत से ऐसे नियम और कानून भी थोप दिए जाते है जिन्हें न चाहकर भी मानना पड़ता है|

आज हम आपको दुनिया के कुछ ऐसे ही स्कूलों के बारे में बताने वाले हैं। जहां के नियम जानकर एक पल के लिए आप भी हैरान रह जाएंगे। यकीन न हो तो एक बार खुद देख लीजिए।
लाल स्याही का इस्तेमाल

बचपन में हमारी कॉपी तो लाल रंग की स्याही से भर जाती थी। मगर अब ऑस्ट्रेलिया और यूके के कुछ स्कूलों में टीचर्स, बच्चों की कॉपी में लाल रंग की स्याही का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

हाथ उठाना है मना

बचपन के दिनों की सबसे अच्छी यादों में से एक बात ये भी याद आती है कि जब हमें क्लास में कोई जवाब आता था, तो फौरन ही हाथ उठा देते थे। मगर अब तो कई स्कूल में बच्चों के हाथ उठाने की इस आदत पर भी रोक लगा दी गई है।

बेस्ट फ्रेंड बनाने से है मनाही

स्कूल में कुछ ऐसे दोस्त बनते हैं, जिनसे जीवनभर दोस्ती कायम रहती है। इंग्लैंड के स्कूलों में ऐसा नियम है कि बच्चों को आपस में बेस्ट फ्रेंड बनाने से मना किया जाता है। और तो और बच्चों को ये सिखाया जाता है कि वे बड़े सर्कल में लोगों से दोस्ती करें।

बालों पर नहीं कर सकते कलर

टोक्यो के कुछ स्कूल्स में बच्चों को कलर डाई करने से मना किया गया है। ऐसा इसलिए कि कलर बच्चों के नेचुरल बालों को खराब कर देता है। इसके कई साइड इफेक्ट्स हैं।

मटर वाली सजा

एशिया में कुछ ऐसी स्कूल्स भी हैं जहाँ बच्चों को सजा के तौर पर फ्रोज़न (बर्फ से जमे हुए) मटर के दानों पर घुटने टेककर खड़ा होना पड़ता है।

‘डाइवोर्स’ और अन्य शब्दों पर है बैन

न्यू यॉर्क के स्कूलों में 50 ऐसे शब्द हैं जो ब्लॉक कर दिए गए हैं। ‘poverty’, ‘religion’ ‘divorce’ और अन्य सहित ऐसे कई शब्द हैं, जिन पर रोक लगा दी गई है। स्कूल्स का मानना है कि इन शब्दों के इस्तेमाल से बच्चों की बुरी यादें ताजा हो जाती है।

नहीं लगा सकते डियो

Pennsylvania के स्कूल में ‘AXE’ ब्रांड के डियोड्रेंट को बैन कर दिया गया है। बाकी कई ऐसी स्कूल्स हैं जहाँ बच्चों के डियोड्रेंट लगाने पर रोक लगा दी गई है।

स्कूल्स में मिलता है सोने को

चीन के स्कूलों में ऐसा नियम है कि बच्चों को स्कूल समय के दौरान आधा घंटा (30 मिनट) सोने की अनुमति दी जाती है।

सिर्फ इतने बार जा सकते हैं टॉयलेट

‘Chicago’ के एक स्कूल में ऐसा नियम है कि बच्चे स्कूल के समय में केवल तीन बार ही टॉयलेट जा सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां के स्कूल प्रशासन को लगता है कि बच्चों का टाइम वेस्ट होता है।

आपकी भी है कोई याद?

यदि आपकी भी स्कूल में कोई ऐसा नियम रहा हो जो अन्य स्कूलों से अलग हो, तो हमें ये बात कमेंट्स के जरिए जरूर शेयर करें।

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